इस रात के साथ ये सप्ताह भी गुजर गया, पर अगर सच बोलू तो पिछले कुछ सालो में इतना बुरा वक़्त कभी नहीं देखा था. खुद को इतनी मज़बूर और बेबस स्थिति में पहले कभी फंसा हुआ नहीं पाया था. हफ़्ते की शुरुआत हुयी जयदीप काकोसा के accident की ख़बर से और फिर वंदना मेम के पिताजी के देहांत का समाचार मिला. दोनों ही मेरे दिल के बहुत करीब है, एक जयदीप काकोसा जो मेरे हर अच्छे बुरे वक़्त में साथ खड़े रहते है, तो दूसरी तरफ़ वंदना मेम जिनसे मुझे पत्रकार बनने की प्रेरणा मिली थी. दोनों की ही मेरे जीवन में एक खास जगह है और इसीलिए जरुरत के समय ना पहुँच पाने का बहुत दुःख हो रहा था. लिहाज़ा वंदना मेम को WhatsApp के ज़रिय सांत्वना पत्र भेज दिया और जयदीप काकोसा का हालचाल call करके पूछ लिया. दोनों को वचन भी दिया कि जैसे ही समय मिलेगा, मिलने जरूर आऊगा. काम और बुरी खबरों के बिच लगभग ये सप्ताह गुजर ही रहा था कि जाते-जाते ऐसा झटका दे गया कि जो मुझे उम्र भर याद रहेगा. उपचुनाव की तैयारियों के चलते आज अलवर के बहरोड़ और मुंडावर के दौरे पर जाना था. सुबह-सुबह छोटे भाई Sunny का call आया और समाचार मिला कि मेरी Sweety ने आज ...
A blog dedicated to my beloved pet Sweety. Today she is not with me, but through this blog I'll be sharing her story, her struggle for survival and how she changed my life. Last but not the least, being an animal she taught me the key lessons of humanity.