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Episode 1: The curtain raiser: Rest in Peace Sweety


इस रात के साथ ये सप्ताह भी गुजर गया, पर अगर सच बोलू तो पिछले कुछ सालो में इतना बुरा वक़्त कभी नहीं देखा था. खुद को इतनी मज़बूर और बेबस स्थिति में पहले कभी फंसा हुआ नहीं पाया था.

हफ़्ते की शुरुआत हुयी जयदीप काकोसा के accident की ख़बर से और फिर वंदना मेम के पिताजी के देहांत का समाचार मिला. दोनों ही मेरे दिल के बहुत करीब है, एक जयदीप काकोसा जो मेरे हर अच्छे बुरे वक़्त में साथ खड़े रहते है, तो दूसरी तरफ़ वंदना मेम जिनसे मुझे पत्रकार बनने की प्रेरणा मिली थी. दोनों की ही मेरे जीवन में एक खास जगह है और इसीलिए जरुरत के समय ना पहुँच पाने का बहुत दुःख हो रहा था. लिहाज़ा वंदना मेम को WhatsApp के ज़रिय सांत्वना पत्र भेज दिया और जयदीप काकोसा का हालचाल call करके पूछ लिया. दोनों को वचन भी दिया कि जैसे ही समय मिलेगा, मिलने जरूर आऊगा.

काम और बुरी खबरों के बिच लगभग ये सप्ताह गुजर ही रहा था कि जाते-जाते ऐसा झटका दे गया कि जो मुझे उम्र भर याद रहेगा. उपचुनाव की तैयारियों के चलते आज अलवर के बहरोड़ और मुंडावर के दौरे पर जाना था. सुबह-सुबह छोटे भाई Sunny का call आया और समाचार मिला कि मेरी Sweety ने आज सुबह ही घर की दहलीज़ पर दम तोड़ दिया. 12 वर्षो तक जो शिखरानी गढ़ में संघर्ष करती रही, उसे भी बाकि कुत्तो की तरह किसी ओर के साथ भेज दिया गया. वैसे खास तो वो सिर्फ मेरे लिए ही थी, शिखरानी गढ़ में कितने कुत्ते आये और गए, तो बाकि सब के लिए वो महज एक बूढी हो चुकी कुत्तिया थी, जिसे आज नहीं तो कल जाना ही था.

मेरे लिए शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है कि Sweety मेरे लिए क्या मायने रखती थी? 12 साल के गहरे रिश्ते से ज्यादा गहरे मेरे बहुत से राज़ जो सिर्फ वो जानती थी, सबको समेट कर चुप चाप चली गयी. मैं ये कैसे भूल सकता हूँ कि पत्रकारिता की ओर जब मैंने पहला कदम बढ़ाया था तो वो साथ थी. ज़िन्दगी के बहुत अहम् सबक उस कुत्तिया ने सिखाये थे मुझे. जानवर होते हुए भी एक बेहतर और सुलझा हुआ इंसान बनने की प्रेरणा मिली थी मुझे उससे. समय-समय पर उसके संघर्ष ने मुझे सिखाया कि कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती.

आज उसके जाने का दुःख घर में सबको हुआ होगा, लेकिन इसमें भी उसी की जीत छिपी है. मैं कैसे भूल सकता हूँ, कि जब मैं उसे ले कर आया था तो कोई भी नहीं चाहता था कि वो घर में रहे. घर में पहले से ही एक छोटी डेसचहंड नसल का  कुत्ता था Peter, जो कि बहुत ज्यादा समझदार था. छोटा होने के बावजूद वो घर की security का काम बखूबी निभाता था. वो इतना समझदार था कि ना तो वो किसी पर निर्भर रहता और ना ही कभी घर में गन्दगी करता.

स्वाभाविक रूप से Sweety की घर में पहली चुनौती थी खुद को साबित करने की. Peter की ही तरह घरवालों के दिल में अपने लिए एक खास जगह बनाने की. Sweety छोटी थी, तो ना वो उतना समझ पाती थी और कभी-कभी घर में गन्दगी भी कर दिया करती थी, इसीलिए उसकी तुलना जब कभी Peter से होने लगी, जिसने उसकी परेशानियों को ओर बढ़ा दिया था.

Sweety के आने से घर में सिर्फ़ दो लोग खुश थे, एक मैं और दूसरा खुद Peter, जिसे Sweety में अपनी future Girl-Friend दिखाई दे रही थी. घरवाले भले ही दोनों की तुलना करते हो, लेकिन Peter को Sweety के आने से कोई परेशानी नहीं थी.

जैसा कि मैंने कहा कि मेरे घरवालो के लिए वो सिर्फ़ एक कुत्तिया थी, तो जब उसने घर कि दहलीज पर अपना दम तोडा, तो सुबह बिना किसी को सुचना दिए किसी के हाथो उसे भेज दिया गया. उसे दफ़नाया या युहीं फेंक दिया, मुझे नहीं पता. लेकिन सोचता हूँ कि अपनी आख़री सांस उसने घर की देहलीज पर ही क्यों ली?

अगले अंक में पढ़िए कि उस 'कुत्तिया' ने मेरे जीवन में बदलाव लाने में कैसे मुख्य भूमिका निभाई और कैसे उसके संघर्ष ने मुझे मेरे जीवन के अहम् सबक सिखाये?

To be continued... 

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